केरल के बाढ़ पीड़ितों की मदद करना, मतलब खुद की कब्र खोदना

बिच्छुओं को बहने से बचाने की मूर्खता बन्द करो हिन्दूओं…..

kearla hindu woman

यह दलित वनवासी महिला याद है? केरल की है अब याद आया? इसको मिशनरी गुण्डों ने सिर्फ इसलिए बुरी तरह पीटा और इसके कपड़े फाड़ दिए थे क्योंकि ये पूजा कर रही थी। केरल में ईसाई मिशनरियों और जिहादियों का आतंक अब इतना बढ़ चुका है कि हिन्दुओं को पूजा अर्चना औरअपने धार्मिक रीति रिवाजों को पूरा करने का अधिकार भी छीना जा रहा है। सब मंदिरों पर तो जिहादी सरकार ने कब्जा जमाया हुआ ही है।

मधु याद है? वह गरीब दलित लड़का। जिसे इन हवसी जिहादियों ने एक मुट्ठी चावल के लिए मौत के घाट उतार दिया था। केरल के स्वयंसेवक याद हैं जो मार दिए गए? तो इन हराम के जनों की मदद कोई क्यों करे? आज ये मिशनरी, वामपंथी, अल्पसंख्यों के संगठन केंद्र सरकार पर आरोप लगा रहे हैं, उत्तर भारत को कोस रहे हैं, जिनके खिलाफ ये घृणा करते आए उनसे भीख मांग रहे हैं। भीख मिलने पर भी एहसानफरामोशों की तरह अपने मालिक को दिल्ली में रैली निकालकर गाली दे रहे हैं। इन दुष्टों को एक पैसे की मदद देना अपराध है।

मदद करनी है तो केवल धार्मिक हिन्दूओं की हो। बाकी विधर्मियों को जैविक कचरे के प्राकृतिक निस्तारण के रूप में छोड़ दिया जाए। जिन्होंने 500 वर्ष केरल को लूटा, हमारी संस्कृति को नष्ट किया, हमारे लोगों को मतांतरित किया। फिर भी यदि संघ जैसे संगठन मानवता के नाम पर विधर्मियों को भी बचा रहे हैं तो अपनी कब्र स्वयं ही खोद रहे हैं। यदि संघ हिन्दू संगठन है तो केवल हिन्दूओं को बचाए। युद्ध के बीच में शत्रु के घावों पर सेफ़्रोमाईसीन नहीं लगाई जाती, घावों में मिर्च डाला जाता है। वामपंथी ईसाई सर्पों की मदद ऐसा ही है जैसे दंगों के दौरान कोई संघी मुसलमानों के मोहल्ले में पहुच जाए तो वहाँ भी मरहम-पट्टी की पेटी खोलकर बैठ जाए और प्राथमिक उपचार कराके वही मुसलमान इनकी सेवा से खुश होकर जिन्दगी से ही रिटायर कर दे। ऐसे आज केरल में एक स्वयंसेवक मलेच्छों को बचाते बचाते स्वयं ही प्राण खो बैठा।

इसलिए ऐसी आत्मघाती मूर्खता स्वयं की ही कब्र खोदना है। मोदीजी ने कश्मीरी मुल्लों पर बाढ़ में 18000 करोड़ लुटा दिए। ये पैसा क्या टैक्स में उनके का बाप भरा था? इससे पोटेंशियल आतंकियों की ही रक्षा हुई। तब भी बाढ़ में जा जाकर मूर्ख हिन्दूओं ने मुल्लों को बचाया। जो बाढ़ के तुरन्त बाद आतंकवाद प्रबल होकर उठा और 2 वर्ष तक अनेक मुठभेड़ों में हमारे दर्जनों जवानों के प्राण लिए। आखिरकार उन सर्पों ने भाजपा को भी बीच सरकार से उखाड़ ही फेंका। अब कोई भक्त कहे कि स्वयं हटे तो पूर्णतः विफल होकर ही स्वयं हटना पड़ा न। बिच्छुओं को बहने से बचाने की मूर्खता बन्द करो हिंदुओं।

 

August 20, 2018

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  • Aap jo keh rahey hain, galat nahin hai lekin Hindu apna dharam nibhana jaante hain. Hamara dharam har dukhi praani ki sahayata ki sabhyata vaala hai.

  • सही कह रहे आप, हिन्दू मानवता से परे नहीं है, यहाँ तक की कीड़े मकोड़ो पैर के निचे आ जाने पर अफ़सोस करता है, केरल वासी फिर भी इन्सान है,

    एक है RSS के दिव्यांग स्वयं सेवक अनूप जी !

    केरल मे बाढ़ राहत कार्यो मे जी जान से जूटे हुए थे । पीड़ित लोगो की सहायता कर रहे थे ! बाढ का पानी उतरते ही वामपंथथियो ने पुनः अपना असली रुप दिखाना शुरु किया !

    वामपंथियो ने एक रात अनूपजी को बुरी तरह से पीटा और “कृत्रिम पैर” भी ‌तोड़ दिया !

    क्यों —- क्योंकि हिन्दू निर्दयी नहीं है!!

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